चिरजा(17)-फाल्गुनी धमाल श्री लूंग माँ री तर्ज- रंग रूङो रे राठोङा थारी महफिल रो

रंग ऊङे रे वलधरा वाली धाम हालो रे । रंग ऊङे रे ।।टेर।।  सिंह री असवारी माता लूंग माँ बिराजे रे ।  काबरा कूकरिया काळा रे गौरा रे ।।   रंग ऊङे रे••…

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में चारण हुं

मैं देवी पुत्र कवि,ज्ञान की छविकलम का वारण हूँ, मैं चारण हूँ |  मैं देवी पग का दास,दिव्य नर खासशारदे धारण हूँ मैं चारण हूँ |  मैं तलवारों की धार,शब्द …

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चारण देवीयां

चारण देविया   सेणी जी लालस जाति की चारणी गुजरात की काछेला वेदा जी की पुत्री थी ! अपनी बाल्य अवस्था मे हिमालय जाकर अपना लोकिक शरीर त्याग दिया था ! वीझ…

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